मोहब्बत की नहीं फ़ुर्सत कि मौसम आम का आया
नहीं अब हुस्न की हसरत कि मौसम आम का आया
बहुत अच्छा किया जो तर्क-ए-उल्फ़त कर लिया तुम ने
निभेगी आम से उल्फ़त कि मौसम आम का आया
तेरा उर्यां बदन, बोसा-जनी तुझ को मुबारक हो
हमें है आम की चाहत कि मौसम आम का आया
दशहरी हो या अल्फांसो वो चौसा हो या बादामी
करेंगे चूम कर स्वागत कि मौसम आम का आया
— Aditya















