Aditya
Aditya
Ghazal

मोहब्बत की नहीं फ़ुर्सत कि मौसम आम का आया

नहीं अब हुस्न की हसरत कि मौसम आम का आया

बहुत अच्छा किया जो तर्क-ए-उल्फ़त कर लिया तुम ने
निभेगी आम से उल्फ़त कि मौसम आम का आया

तेरा उर्यां बदन, बोसा-जनी तुझ को मुबारक हो
हमें है आम की चाहत कि मौसम आम का आया

दशहरी हो या अल्फांसो वो चौसा हो या बादामी
करेंगे चूम कर स्वागत कि मौसम आम का आया

— Aditya

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