सभी के साथ रहकर भी हुआ तन्हा बशर देखो
किसी पिंजरे के जैसे हो गए दीवार-ओ-दर देखो
दरख़्तों पे लकड़हारे ने कुल्हाड़ी को दे मारा
परिंदे शाख पर बैठे हैं कितने बे-खबर देखो
तुम्हें अपने अलावा कुछ नज़र आए तो फिर कहना
हमारे दिल की गहराई कभी तुम नाप कर देखो
अगर बीमार हो और हों दवाएं बे-असर सारी
मुहब्बत कर के देखो और फिर उसका असर देखो
जमाने में बहुत सी चीज़ हैं जो ख़ूब-सूरत हैं
निगाहों की लखन रेखा कभी तुम लाँघ कर देखो
अगर तन्हा चलोगे तो तुम्हें भटकाएँगे रस्ते
सभी को साथ रक्खो और फिर अपना सफ़र देखो
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