Aditya
Aditya
Ghazal

ख़ता है इश्क़ तो क्या ये ख़ता ज़रूरी है

सुख़न-वरों के लिए ये दवा ज़रूरी है

उड़ान भरने को गर आस्माँ ज़रूरी है
मुसाफिरों को भी तो रास्ता ज़रूरी है

किसे मिली है बिना ठोकरों के ही मंज़िल
सफ़र को ज़ख़्म का भी ज़ाइका ज़रूरी है

फ़क़त कहानियों से इल्म कौन पाया है
हर एक शख़्स को इक हादसा ज़रूरी है

बयान दिल के जो होंटों पे सब दिखा जाए
सभी के चहरों पे वो आइना ज़रूरी है

मुसीबतों के सिवा कौन यार है मेरा
फ़क़त इन्हीं से मिरा राब्ता ज़रूरी है

— Aditya

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