sach hai ki mujhko tumse mohabbat nahin rahi | सच है कि मुझको तुम सेे मोहब्बत नहीं रही

  - Aditya

सच है कि मुझको तुम सेे मोहब्बत नहीं रही
हाँ तुमको देखने की भी हसरत नहीं रही

अब तुमको रोकने के लिए रोऊँगा नहीं
अब जाओ मेरी पहले सी आदत नहीं रही

मेरे बगीचे में नए पौधे उगे मुझे
सूखे हुए शजर की ज़रूरत नहीं रही

जब से निकल पड़ा हूँ मैं ख़ुद की तलाश में
फिर सांस लेने तक की भी फुर्सत नहीं रही

मेरी ग़ज़ल में अब भी है चर्चा तेरा मगर
अब तेरे हुस्न की कोई कीमत नहीं रही

  - Aditya

Mohabbat Shayari

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