mere dil men bhi ik ladki rahtii thii | मेरे दिल में भी इक लड़की रहती थी

  - Aditya

मेरे दिल में भी इक लड़की रहती थी
मैं था शायर वो मेरी शाईरी थी

जब मैं उसके हुस्न पे ग़ज़लें कहता था
दोनों हाथों से चहरा ढक लेती थी

जब मैं उस सेे हिज्र की बातें करता तो
मेरे होटों पे अँगुली रख देती थी

उसकी रंगत का कैसे इजहार करूँं
ऐसा मानो जैसे असली चाँदी थी

ख़ामोश ही रहती, जब मुझ सेे मिलती थी
लेकिन मेरा फोन पे सर खा जाती थी

  - Aditya

Propose Shayari

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