जब तुम्हें वक़्त मिले मेरी ग़ज़ल हो जाना
दे सके मुझ को सुकूँ ऐसी ग़ज़ल हो जाना
जिस के हर लफ़्ज़ में हो इश्क़ का जादू कोई
सात रंगों से सजी सच्ची ग़ज़ल हो जाना
तुम गुलाबों की तरह ख़ुद को सजाए रखना
और बारिश में कभी महकी ग़ज़ल हो जाना
देख कर याद करें लोग मोहब्बत अपनी
मेरे हाथों से लिखी अच्छी ग़ज़ल हो जाना
तर-ओ-ताज़ा जो करे रूह की दुनिया दारी
माने नम दार हवाओं सी ग़ज़ल हो जाना
— Aditya















