Aditya
Aditya
Ghazal

जब तुम्हें वक़्त मिले मेरी ग़ज़ल हो जाना

दे सके मुझ को सुकूँ ऐसी ग़ज़ल हो जाना

जिस के हर लफ़्ज़ में हो इश्क़ का जादू कोई
सात रंगों से सजी सच्ची ग़ज़ल हो जाना

तुम गुलाबों की तरह ख़ुद को सजाए रखना
और बारिश में कभी महकी ग़ज़ल हो जाना

देख कर याद करें लोग मोहब्बत अपनी
मेरे हाथों से लिखी अच्छी ग़ज़ल हो जाना

तर-ओ-ताज़ा जो करे रूह की दुनिया दारी
माने नम दार हवाओं सी ग़ज़ल हो जाना

— Aditya

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