to phir ham na rahenge ham agar tum mujhko mil jaao | तो फिर हम ना रहेंगे हम अगर तुम मुझको मिल जाओ

  - Aditya

तो फिर हम ना रहेंगे हम अगर तुम मुझको मिल जाओ
मेरे धुल जाएँ सारे ग़म अगर तुम मुझको मिल जाओ

हर इक मौसम तुम्हारे बिन मुझे कांटे सा लगता है
गुलों से खिल उठें मौसम अगर तुम मुझको मिल जाओ

ज़माने भर के ज़ख़्मों को मैं पल भर में भुला दूँगा
ज़रूरी फिर नहीं मरहम अगर तुम मुझको मिल जाओ

मुझे डर है कि तुमको खो न दूँ इस भीड़ में इक दिन
बदल जाएगा ये आलम अगर तुम मुझको मिल जाओ

तुम्हारा और मेरा एक हो जाना हो जाएगा
इलाहाबाद का संगम अगर तुम मुझको मिल जाओ

उजाला चाँदनी का दिन में होगा और रातों में
खिलेगी धूप भी मद्धम अगर तुम मुझको मिल जाओ

  - Aditya

Dar Shayari

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