Aditya
Aditya
Sher

वक़्त गुज़रा हुआ यादों में चला आता है

वक़्त के साथ जो गुज़रा वो कहाँ आता है

रूठने और मनाने के रिवाजों से परे
सिर्फ़ तन्हाई में जीने का मज़ा आता है

— Aditya

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