dhoop ki pahli kiran jis pe sawaari chaai ki | धूप की पहली किरण जिस पे सवारी चाय की

  - Aditya

धूप की पहली किरण जिस पे सवारी चाय की
और अदरक की महक से इंतजारी चाय की

यार हम दोनों अलग पर इश्क़ अपना एक है
मेरे दिल से तेरे दिल तक बेशुमारी चाय की
इश्क़, दौलत और शोहरत इनका अपना है मज़ा
अपनी रग में दौड़ती बस इक खुमारी, चाय की

जब मुहब्बत हो जवां, रंगीन हो जब बारिशें
फिर कहाँ मिटती है यारों बेकरारी चाय की

उसके हाथों चाय की इक प्यास बाकी है मगर
ख़त्म करती ही नहीं वो इक उधारी चाय की

  - Aditya

Ujaala Shayari

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