क्या समझाऊँ दुनिया कैसी होती है
मेरी नज़रों से मतलब की होती है
छोटे रस्ते पे हर कोई चलता है
लंबे रस्ते पे मजबूरी होती है
कुछ लोगों के कंधे छोटे होते हैं
जिम्मेदारी लंबी चौड़ी होती है
क्या रिश्ता है तेरा मेरी शामों से
तेरे बिन हर शाम अधूरी होती है
बाद मोहब्बत के जीना मुश्किल होगा
लेकिन मरने में आसानी होती है
जिस्म पे कपड़े होते हैं मँहगे मँहगे
लेकिन आदम की जाँ सस्ती होती है
बस सख़्ती की चादर ओढ़े रहती है
मम्मी अंदर से बच्चों सी होती है
तुम ‘आदी’ को इश्क़ से बिल्कुल मत देखो
इस सेे उसकी आदत गंदी होती है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Aditya
our suggestion based on Aditya
As you were reading Ulfat Shayari Shayari