kya samjhaaoon duniya kaisi hoti hai | क्या समझाऊँ दुनिया कैसी होती है

  - Aditya

क्या समझाऊँ दुनिया कैसी होती है
मेरी नज़रों से मतलब की होती है

छोटे रस्ते पे हर कोई चलता है
लंबे रस्ते पे मजबूरी होती है

कुछ लोगों के कंधे छोटे होते हैं
जिम्मेदारी लंबी चौड़ी होती है

क्या रिश्ता है तेरा मेरी शामों से
तेरे बिन हर शाम अधूरी होती है

बाद मोहब्बत के जीना मुश्किल होगा
लेकिन मरने में आसानी होती है

जिस्म पे कपड़े होते हैं मँहगे मँहगे
लेकिन आदम की जाँ सस्ती होती है

बस सख़्ती की चादर ओढ़े रहती है
मम्मी अंदर से बच्चों सी होती है

तुम ‘आदी’ को इश्क़ से बिल्कुल मत देखो
इस सेे उसकी आदत गंदी होती है

  - Aditya

Ulfat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aditya

As you were reading Shayari by Aditya

Similar Writers

our suggestion based on Aditya

Similar Moods

As you were reading Ulfat Shayari Shayari