Aditya
Aditya
Ghazal

क्या समझाऊँ दुनिया कैसी होती है

मेरी नज़रों से मतलब की होती है

छोटे रस्ते पे हर कोई चलता है
लंबे रस्ते पे मजबूरी होती है

कुछ लोगों के कंधे छोटे होते हैं
जिम्मेदारी लंबी चौड़ी होती है

क्या रिश्ता है तेरा मेरी शामों से
तेरे बिन हर शाम अधूरी होती है

बा'द मोहब्बत के जीना मुश्किल होगा
लेकिन मरने में आसानी होती है

जिस्म पे कपड़े होते हैं मँहगे मँहगे
लेकिन आदम की जाँ सस्ती होती है

बस सख़्ती की चादर ओढ़े रहती है
मम्मी अंदर से बच्चों सी होती है

तुम ‘आदी’ को इश्क़ से बिल्कुल मत देखो
इस से उस की आदत गंदी होती है

— Aditya

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