bina kaanton ke hamko raahguzaar achha nahin lagta | बिना काँटों के हमको रहगुज़र अच्छा नहीं लगता

  - Aditya

बिना काँटों के हमको रहगुज़र अच्छा नहीं लगता
बहुत आसान हो जो वो सफ़र अच्छा नहीं लगता

हमें नाराज़गी पल दो पलों की अच्छी लगती है
चमकना बिजलियों का रात भर अच्छा नहीं लगता

मेरी आँखों में रहकर हाल मेरा पूछते हो तुम
कोई हो इतना हम सेे बेख़बर, अच्छा नहीं लगता

हमारे दर्दे दिल पे वाह वाही करते हो लेकिन
न जाने क्यूँँं हमारा दर्दे सर अच्छा नहीं लगता

तुम अपनी ज़िन्दगी बस चार दिन ही समझते हो
हमें क़िस्सा भी इतना मुख़्तसर अच्छा नहीं लगता

रकीबों से मैं कहता हूँ कि रस्ता छोड़ दें तेरा
यूँँ मरना जुग्नुओं का चाँद पर अच्छा नहीं लगता

जहाँ बंजर जमीनें हो बरसना लाज़मी है पर
जरा सी बात पर यूँं चश्म तर अच्छा नहीं लगता

  - Aditya

Safar Shayari

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