Aditya
Aditya
Ghazal

क्या बताऊँ कि मेरे साथ हुआ है क्या क्या

क्या दिया हम ने उन्हें हम को मिला है क्या क्या

तुम को पाने की तमन्ना में मिटा हूँ मैं, अब
छोड़ के तुम को मेरे पास बचा है क्या क्या

इश्क़ कर के ही मुझे इल्म हुआ है इतना
इश्क़ में क्या है भला और बुरा है क्या क्या

रंग जब हल्के पड़ेंगे तो नज़र आएगा
क्या हक़ीक़त है यहाँ और धुआँ है क्या क्या

इश्क़ के मर्ज़ का ईलाज बता चारा-गर
दर्द के हद से गुज़रने पे दवा है क्या क्या

— Aditya

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