Aditya
Aditya
Ghazal

तू जब जब हसरत से देखा करती है

जाने क्या बिन बोले पूछा करती है

कैसे हर कोई तेरा हो जाता है
क्या तू कोई जादू टोना करती है

तेरी बातों के ही मिसरे लिखता हूँ
मतलब तू ग़ज़लों से खेला करती है

तेरे घुँघराले काले बालों को तो
क़ुदरत भी हसरत से देखा करती है

बा'द मोहब्बत के तेरी ख़ुश्बू से ही
मेरे दिल की बगिया महका करती है

इक सेहर करना दूजा बातें करना
और तू इन आँखों से क्या क्या करती है

ये इश्क़ नहीं है तो फिर ये बात है क्या
जो मुझ को भी तेरे जैसा करती है

— Aditya

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