तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दियादूर नींदों से कहीं रात गुज़ारी मैं नेलौट कर आए जो घर शाम थके हारे तबझूठ की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने— Aditya