Aditya
Aditya
Sher

तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दिया

दूर नींदों से कहीं रात गुज़ारी मैं ने

लौट कर आए जो घर शाम थके हारे तब
झूठ की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने

— Aditya

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