Aditya
Aditya
Ghazal

शाम उतरी आसमाँ से याद उन की आ गई

और आँखों की नमी इन कागज़ों पे छा गई

इक सियाही छा गई उस आसमाँ के शहर में
एक काली रात मेरे दिल पे भी गहरा गई

हम दरख़्तों को भी यादें अपनों की आने लगी
पास के जंगल की ख़ुश्बू जो हवा महका गई

एक तो पहली मोहब्बत फिर कमी दिलदार की
तीसरी तन्हाई मिल कर जान मेरी खा गई

माँ ने पूछा क्यूँ ख़फ़ा हो बात भी करते नहीं
इतने में आँखों से मेरे शा'इरी उतरा गई

माँ को शक था बस यही हम भी मोहब्बत-बाज़ है
उस पे मेरी शा'इरी उन को यक़ीं दिलवा गई

— Aditya

Aditya की और रचनाएँ

इसी क़लम से और ghazal

Aditya की सभी रचनाएँ देखें →

Best Love Shayari Collection

best love shayari collection के शेर।

सभी Best Love Shayari Collection शायरी →

मिलते-जुलते शायर

उसी अंदाज़ की आवाज़ें

मूड से ब्राउज़ करें

एहसास के अनुसार शायरी