तेरे दिल की राह पर चलते ज़माना हो गया
फिर भला क्यूँ मंज़िलों से मैं बे-गाना हो गया
पास मेरे तू नहीं लेकिन तेरी तस्वीर है
बस इसी को देख कर मौसम सुहाना हो गया
मुझ पे मेरा बस नहीं है हाल क्या होगा मिरा
गर तिरा ऐसे में मेरे पास आना हो गया
और कोई है नहीं जिस पर कभी मैं मर सकूँ
बस बिखर जाऊँगा मैं गर तू रवाना हो गया
— Aditya















