teraa man meraa man bhi ho saka hai | तेरा मन मेरा मन भी हो सकता है

  - Aditya

तेरा मन मेरा मन भी हो सकता है
फिर तू मेरा जीवन भी हो सकता है

मेरी उदासी, मेरी उदासी थोड़ी है
मेरा चेहरा दर्पण भी हो सकता है

मैं जो तुम सेे इतना डर कर रहता हूँ
मेरा आत्मसमर्पण भी हो सकता है

प्रेम के चाक पे तुमने मुझको रक्खा है
मेरी रूह का मंथन भी हो सकता है

आज तो ये जंगल है आगे क्या ही पता
कल ये किसी का आंगन भी हो सकता है

ख़ामोशी मिट्टी की गुल्लक है जिस
में
हाले दिल का वर्णन भी हो सकता है

क्यूँँं न हवाओं का हम दोनों वेश धरें
फिर अपना आलिंगन भी हो सकता है

मेरा प्रेम है दो दिन का ये मत सोचो
कारावास आजीवन भी हो सकता है

प्रेम करेगा जो बस वो ही समझेगा
मिट्टी का तन चंदन भी हो सकता है

  - Aditya

Wahshat Shayari

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