vo miree KHvaab men aa.e ye zaroori to nahin | वो मिरे ख़्वाब में आए ये ज़रूरी तो नहीं

  - Aditya

वो मिरे ख़्वाब में आए ये ज़रूरी तो नहीं
वो मिरे ख़्वाब सजाए ये ज़रूरी तो नहीं

ज़िन्दगी में हैं कई और भी तो शख़्स उसके
वो फकत मुझ सेे निभाए ये ज़रूरी तो नहीं

बिजलियाँ भी तो गिरा करती हैं अब्र से अक्सर
आँख, आँसू ही गिराए ये ज़रूरी तो नहीं

रात भर जागने की वजह कई होती हैं इश्क़ ही नींद उड़ाए ये ज़रूरी तो नहीं

उसकी तस्वीर से सैराब हुआ करता हूँ
वो मेरे रू-ब-रू आए ये ज़रूरी तो नहीं

लोग गैरों की तरक्की से भी जल उठते हैं
आग ही आग लगाए ये ज़रूरी तो नहीं

  - Aditya

Paani Shayari

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