Meaning of

जिंदान

jindaan • زندان

कारागार; कालकोठरी

prison; dungeon

زندان; قید خانہ

Persian

किसी से क्या गिला कीजे शजर अब
हमें ज़िंदान घर सा लग रहा है

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देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख

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इसी लिए तो है ज़िंदाँ को जुस्तुजू मेरी
कि मुफ़लिसी को सिखाई है सर-कशी मैं ने

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रोक सकता हमें ज़िंदान-ए-बला क्या 'मजरूह'
हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं

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उसी के हाथ लगेगा सुराग़ हस्ती का
जो अपनी ज़ात के ज़िंदाँ से दूर निकलेगा

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बस इतनी सी मेरी तक़दीर बदली
कभी ज़िंदाँ कभी ज़ंजीर बदली

न इन आँखों ने अपने ख़्वाब बदले
न ख़्वाबों ने कोई ता'बीर बदली

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मौसम-ए-ज़िंदान बदले तो क़फ़स गुलज़ार हो
क़ैदखाने को बदल कर लाभ कुछ होगा नहीं

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ईमान की दौलत का असर सूख रहा है
क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है

आराम नहीं ज़ीस्त को ज़िंदान में सरवर
हर लम्हा मेरा कस्ब-ए-हुनर सूख रहा है

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पहले ज़िंदाँ में उस की तस्वीर लगाई जाए
फिर चाहे जितना मेरी उम्र क़ैद बढ़ाई जाए

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न जाने कब भला मुझ पे गिरेगी बर्क़ आ कर
न जाने कब भला छूटूँगा इस ज़िंदान से मैं

न जाने कब भला टूटेगी सर पे कोई आफ़त
न जाने कब भला जाऊँगा आख़िर जान से मैं

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किसी से क्या गिला कीजे शजर अब
हमें ज़िंदान घर सा लग रहा है

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देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख

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'जिंदान' का अर्थ है कारागार या कालकोठरी, जो बंधन और अंधकार की छवियाँ उभारता है। कविता में यह आत्मा के सांसारिक इच्छाओं में फँसने या दुःख और लालसा के दमनकारी भार का प्रतीक है।

कवि 'जिंदान' का प्रयोग अक्सर भाग्य की जंजीरों के खिलाफ मानव आत्मा के संघर्ष को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह अधूरी इच्छाओं से बंधे दिल के आंतरिक संघर्ष का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है।

काव्यात्मक परिदृश्य में, 'जिंदान' अस्तित्व की छायाओं के बीच मुक्ति की आत्मा की लालसा का रूपक है।