Meaning of

माज़ी

maazi • ماضی

अतीत; बीते हुए समय

past; bygone times

ماضی; گزرا ہوا وقت

Arabic

माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है
मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है

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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में
मेरी दिलचस्पी ख़त्म हो गई है शादी में

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हालत-ए-हाल से बेगाना बना रक्खा है
ख़ुद को माज़ी का निहाँ-ख़ाना बना रक्खा है

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टहनी पे ख़मोश इक परिंदा
माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर

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माज़ी-ए-मरहूम की नाकामियों का ज़िक्र छोड़
ज़िन्दगी की फ़ुर्सत-ए-बाक़ी से कोई काम ले

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जब भी माज़ी के ज़ख़्मों पर मुझे हवा लगती है
बन के मरहम दिल पे सिगरेट ही दवा लगती है

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माज़ी भी है उदास मेरे हाल की तरह
ये साल भी गुज़र गया हर साल की तरह

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फ़ुर्सत नहीं मुझे कि करूँँ इश्क़ फिर से अब
माज़ी की चोटों से अभी उभरा नहीं हूँ मैं

डर है कहीं ये ऐब उसे रुस्वा कर न दे
सो ग़म में भी शराब को छूता नहीं हूँ मैं

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दर्द का आलम सुनहरा, भेज दे
काश माज़ी, लुत्फ़-ए-ईज़ा भेज दे

वाक़या, दिल टूट जाने का मेरे
और तेरे ज़ुल्मों का, क़िस्सा भेज दे

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अपने दिल की ज़मीं के आख़िरी कोने में कहीं
माज़ी को दफना के आऊंँगा , चला जाऊँँगा

सहरा को सर्द हवा ने किया है इतना खु़श्क
रेत पर दरया बनाऊँगा , चला जाऊँँगा

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माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है
मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है

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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में
मेरी दिलचस्पी ख़त्म हो गई है शादी में

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'माज़ी' शब्द इतिहास के भार और समय के प्रवाह को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर पुरानी यादों, लालसा, या जो खो गया है या संजोया गया है, उस पर चिंतन की भावना को वहन करता है।

कवि अक्सर 'माज़ी' का उपयोग स्मृति और हानि के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अतीत के लिए लालसा या समय के प्रवाह पर ध्यान को व्यक्त कर सकता है।

कविता में, 'माज़ी' समय की गूंजों के लिए एक पुल है, जो दिल की गहरी चिंतनशीलता के साथ प्रतिध्वनित होता है।