Meaning of

मक्र

makr • مکر

धोखा; चालाकी; छल

deceit; cunning; trickery

دھوکہ; چالاکی; فریب

Arabic

एक और वा'दा उस ने किया मोहब्बत का
पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी

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मिरे घर क्यूँँ ले आते हो गली बाज़ार की बातें
चिढ़ाती हैं मुझे झूठे बिके अख़बार की बातें

मुकरता है हमेशा तू किए वादे निभाने से
तेरे वादे तिरी क़स
में हुईं सरकार की बातें

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नाम आया है तेरा जब से गुनहगारों में
सब गवाह अपनी गवाही से मुकरना चाहें

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तुम अपने क़ौल से मुकरोगी तो नहीं जानाँ
हमारे सामने जब ख़ानदान आएँगे

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वो गुलाबी पंखुरी थी बाग की
और मैं मकरन्द लेने आ गया

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हम नहीं वो जो करें ख़ून का दावा तुझ पर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जाएँगे

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सियासतदार थे वो यार फ़ितरत थी मुकर जाना
कि पागल थे लगा बैठे वफ़ा की आरज़ू उन सेे

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नबील' ऐसा करो तुम भी भूल जाओ उसे
वो शख़्स अपनी हर इक बात से मुकर चुका है

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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मुझे ही चाहता है मुद्दतों से वरना फिर
रक़ीब तक के तिरे हम मुकरने वाले थे

ये उस का घर है यहीं पे कहीं पे यारों सो
नहीं तो शहर से कब के निकलने वाले थे

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एक और वा'दा उस ने किया मोहब्बत का
पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी

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मिरे घर क्यूँँ ले आते हो गली बाज़ार की बातें
चिढ़ाती हैं मुझे झूठे बिके अख़बार की बातें

मुकरता है हमेशा तू किए वादे निभाने से
तेरे वादे तिरी क़स
में हुईं सरकार की बातें

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मक्र धोखे और चालाकी का भार लिए होता है, अक्सर भाग्य या व्यक्तियों की चालाकी भरी चालों का वर्णन करने के लिए उपयोग होता है। कविता में, यह एक छिपे हुए जाल की छवि को उभारता है, एक ऐसा जाल जो कुशलता से बिछाया गया हो। इस शब्द का सार इसके धोखे की कला और फंसे हुए लोगों की असहायता को व्यक्त करने की क्षमता में है।

कवि अक्सर मक्र का उपयोग विश्वासघात और मानव स्वभाव की छिपी जटिलताओं की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की चालाकी या भाग्य की अप्रत्याशित मोड़ों को चित्रित कर सकता है। यह शब्द सच्चाई के विपरीत है, सत्य और भ्रम के बीच के तनाव को उजागर करता है।

मक्र छायाओं का नृत्य है, जहाँ सत्य और भ्रम एक नाजुक संतुलन में नृत्य करते हैं।