Meaning of

मेहर

mehr • مہر

सूरज; दया; स्नेह

sun; kindness; affection

سورج; مہربانی; محبت

Persian

ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे में'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो

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उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का

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न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबाँ आते आते

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ये उस की मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
निकल आए जो महफ़िल में तो क़त्ल-ए-आम हो जाए

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दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए

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आए तो यूँँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबान
भूले तो यूँँ कि गोया कभी आश्ना न थे

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न जाने कैसी महरूमी पस-ए-रफ़्तार चलती है
हमेशा मेरे आगे आगे इक दीवार चलती है

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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए

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ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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मेहर का मूल अर्थ सूरज है, जो प्रकाश और गर्मी का स्रोत है। कविता में, यह दया और स्नेह का प्रतीक बन जाता है, जैसे सूरज की पोषक किरणें जीवन को संजीवनी देती हैं।

कवि अक्सर 'मेहर' का प्रयोग प्रेम की गर्माहट या प्रिय की कोमल दया को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह कठोर तत्वों के विपरीत, स्नेह के पोषक पहलुओं को उजागर करता है।

मेहर स्नेह की कोमल गर्माहट का प्रतीक है, भावनाओं के क्षेत्र में एक धूप से भरा आलिंगन।