na jaana ki duniya se jaata hai koii | न जाना कि दुनिया से जाता है कोई

  - Dagh Dehlvi

न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबाँ आते आते

  - Dagh Dehlvi

Duniya Shayari

Our suggestion based on your choice

    दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँ अब उदास बैठ
    ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
    Salman Zafar
    46 Likes
    एक तरफ़ है पूरी दुनिया एक तरफ़ है मेरा घर
    लेकिन तुमको बतला दूँ मैं दुनिया से है अच्छा घर

    सब कमरों की दीवारों पर तस्वीरें हैं बस तेरी
    मुझसे ज़ियादा तो लगता है जानेमन ये तेरा घर
    Read Full
    Tanoj Dadhich
    36 Likes
    जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना
    मगर ख़ुदा के लिए बेवफ़ाई न करना
    Munawwar Rana
    84 Likes
    ये जितने मसाइल हैं दुनिया में, सब
    तुझे देखने से सुलझ जायेंगे
    Siddharth Saaz
    28 Likes
    सिर्फ़ ज़िंदा रहने को ज़िंदगी नहीं कहते
    कुछ ग़म-ए-मोहब्बत हो कुछ ग़म-ए-जहाँ यारो
    Himayat Ali Shayar
    42 Likes
    ये दुनिया ग़म तो देती है शरीक-ए-ग़म नहीं होती
    किसी के दूर जाने से मोहब्बत कम नहीं होती
    Unknown
    43 Likes
    अपनी दुनिया भी चल पड़े शायद
    इक रुका फ़ैसला किया जाए
    Madan Mohan Danish
    22 Likes
    फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई दे
    लहजे को सच्चाई दे

    दुनिया है जंगल का सफ़र
    लछमन जैसा भाई दे
    Read Full
    Tariq Shaheen
    32 Likes
    इतने दुख से भरी है ये दुनिया
    आँख खुलते ही आँख भर आए
    shampa andaliib
    अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास
    मैं तुम्हें कहता भी रहता था कि दुनिया तेज़ है
    Tehzeeb Hafi
    107 Likes

More by Dagh Dehlvi

As you were reading Shayari by Dagh Dehlvi

    वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
    तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
    Dagh Dehlvi
    37 Likes
    ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
    तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
    Dagh Dehlvi
    31 Likes
    दिल-ए-नाकाम के हैं काम ख़राब
    कर लिया आशिक़ी में नाम ख़राब

    इस ख़राबात का यही है मज़ा
    कि रहे आदमी मुदाम ख़राब

    देख कर जिंस-ए-दिल वो कहते हैं
    क्यूँ करे कोई अपने दाम ख़राब

    अब्र-ए-तर से सबा ही अच्छी थी
    मेरी मिट्टी हुई तमाम ख़राब

    वो भी साक़ी मुझे नहीं देता
    वो जो टूटा पड़ा है जाम ख़राब

    क्या मिला हम को ज़िंदगी के सिवा
    वो भी दुश्वार ना-तमाम ख़राब

    वाह क्या मुँह से फूल झड़ते हैं
    ख़ूब-रू हो के ये कलाम ख़राब

    चाल की रहनुमा-ए-इश्क़ ने भी
    वो दिखाया जो था मक़ाम ख़राब

    'दाग़' है बद-चलन तो होने दो
    सौ में होता है इक ग़ुलाम ख़राब
    Read Full
    Dagh Dehlvi
    चुरायगा उसी से आंख कातिल
    ज़रा सी जान जिस बिस्मिल में होगी
    Dagh Dehlvi
    41 Likes
    दिल परेशान हुआ जाता है
    और सामान हुआ जाता है

    ख़िदमत-ए-पीर-ए-मुग़ाँ कर ज़ाहिद
    तू अब इंसान हुआ जाता है

    मौत से पहले मुझे क़त्ल करो
    उस का एहसान हुआ जाता है

    लज़्ज़त-ए-इश्क़ इलाही मिट जाए
    दर्द अरमान हुआ जाता है

    दम ज़रा लो कि मिरा दम तुम पर
    अभी क़ुर्बान हुआ जाता है

    गिर्या क्या ज़ब्त करूँ ऐ नासेह
    अश्क पैमान हुआ जाता है

    बेवफ़ाई से भी रफ़्ता रफ़्ता
    वो मिरी जान हुआ जाता है

    अर्सा-ए-हश्र में वो आ पहुँचे
    साफ़ मैदान हुआ जाता है

    मदद ऐ हिम्मत-ए-दुश्वार-पसंद
    काम आसान हुआ जाता है

    छाई जाती है ये वहशत कैसी
    घर बयाबान हुआ जाता है

    शिकवा सुन आँख मिला कर ज़ालिम
    क्यूँ पशेमान हुआ जाता है

    आतिश-ए-शौक़ बुझी जाती है
    ख़ाक अरमान हुआ जाता है

    उज़्र जाने में न कर ऐ क़ासिद
    तू भी नादान हुआ जाता है

    मुज़्तरिब क्यूँ न हों अरमाँ दिल में
    क़ैद मेहमान हुआ जाता है

    'दाग़' ख़ामोश न लग जाए नज़र
    शे'र दीवान हुआ जाता है
    Read Full
    Dagh Dehlvi

Similar Writers

our suggestion based on Dagh Dehlvi

Similar Moods

As you were reading Duniya Shayari Shayari