Meaning of

मेरहबां

merhabaan • مہرباں

दयालु; करुणामय; परोपकारी

kind; compassionate; benevolent

مہربان; شفیق; خیرخواہ

Persian

इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को

एक मुद्दत के बा'द मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को

तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को

सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को

आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को

साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को

एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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उस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का

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न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबाँ आते आते

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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए
इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए

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बदल जाएँगे ये दिन रात 'अजमल'
कोई ना-मेहरबाँ कब तक रहेगा

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सितम भी मुझ पे वो करता रहा करम की तरह
वो मेहरबाँ तो न था मेहरबान जैसा था

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वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माए मुझे

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हो तो मेहरबाँ तुम हो या फिर मेरा मेहरबाँ कोई न हो
मेरे रहबरों में आप के सिवा तो निशाँ कोई न हो

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हम भी पाते मक़ाम दुनिया में
वक़्त होता जो मेहरबाँ हम पर

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इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को

एक मुद्दत के बा'द मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को

तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को

सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को

आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को

साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को

एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को

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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी

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'मेरहबां' मूल रूप से दया और करुणा का प्रतीक है, जो एक कोमल परोपकारिता की छवि प्रस्तुत करता है। कविता में, यह अक्सर एक पोषणकारी देखभाल की भावना में गहराई तक जाता है, जो एक गर्म आलिंगन की तरह सुकून और सांत्वना देता है।

कवि अक्सर 'मेरहबां' का उपयोग प्रिय की कोमल प्रकृति का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह कठोर भावनाओं के विपरीत, दया की सुखदायक उपस्थिति को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'मेरहबां' दया की एक कोमल फुसफुसाहट है, थकी हुई आत्मा के लिए एक मरहम है।