Meaning of

क़ाल

qaal • قال

वचन; शब्द; कथन

speech; word; saying

قول; لفظ; کہنا

Arabic

रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं
हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं

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कहीं क़ालीन राहों में बिछे हैं
कहीं पैरों में चप्पल भी नहीं है

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ग़ैर क्या देंगें मेरे बारे में
तुझ को बस बद-गुमानियांँ देंगें

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जैसे जैसे बढ़ेंगे इश्क़ के दिन
और ज़्यादा ये सख़्तियाँ देंगें

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दर्द देंगें अज़ाब देंगें वो
और क्या हम को वो मियाँ देंगें

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देंगें ये अहले जुर्म को राहत
बे कुसूरों को फाँसियाँ देंगें

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औलाद से कहूँगा के शिरकत करें सभी
बस वो नज़र न आए मिरे इंतिक़ाल में

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कभी भी सिद्क़-ए-मक़ाल, अक़्ल-ए-हलाल के बिन
क़बूल कोई दुआ, नहीं हो सकेगी साहब

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क़त्ल में मेरे कौन था शामिल
इश्क़, सिद्क़-ए-मक़ाल या कि वफ़ा

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रुख़-ए-निगाह-ए-आतिशा से कलाम कर के आ रहे हैं
हम उन निगाहों को सर-ए-रह सलाम कर के आ रहे हैं

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कहीं क़ालीन राहों में बिछे हैं
कहीं पैरों में चप्पल भी नहीं है

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क़ाल शब्द बोले गए सत्य और शब्दों की शक्ति का भार वहन करता है। कविता में, यह गहरे सत्य, वादों, या घोषणाओं को व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है, जो श्रोता की आत्मा के साथ गूंजते हैं।

कवि अक्सर 'क़ाल' का उपयोग ज्ञान, वादों की बाध्यकारी प्रकृति, और बोले गए शब्दों के प्रभाव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मौन के विपरीत होता है, अभिव्यक्ति के महत्व को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'क़ाल' शब्दों की स्थायी शक्ति और उनके द्वारा वहन किए गए सत्यों की याद दिलाता है।