Meaning of

क़ब्ल

qabl • قبل

पहले; पूर्व

before; prior

پہلے; قبل

Arabic

अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा
नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है

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दुनिया में अा के फँस गया हूँ इस तरह से मैं
मछली फंसी हुई हो कोई जैसे जाल में

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माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है
मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है

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मेरा साथ अभी तू दे दे
मुस्तकबिल ये हाल से बोले

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ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकाँ मंज़िल नहीं लगता
सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता

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सब छतों पे उसी के मकाँ की तरफ़ देखने आते थे
शहर क्या छोड़ा उस शख़्स ने सब को क़िबला बदलना पड़ा

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बिछड़ना ही था मुस्तकबिल हमारा
उसे इस बात पे होता रहा रँज

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इशारा है ख़ुदा का एक दूजे के लिए हैं हम
दुपट्टा तेरा यूँँ नईं फँस रहा मेरी घड़ी में जान

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यही है ख़्वाब मुस्तक़बिल बने तू ही हमारा अब
अकेला सिर्फ़ दिल मेरा सहारा हो नहीं सकता

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मैं ने माना तुम ही तुम हो
दिल में तुम हो दिल भी तुम हो

कल भी जो था तुम ही तुम थीं
और फिर मुस्तक़बिल भी तुम हो

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अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा
नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है

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दुनिया में अा के फँस गया हूँ इस तरह से मैं
मछली फंसी हुई हो कोई जैसे जाल में

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'क़ब्ल' शब्द समय के उस हिस्से को दर्शाता है जो वर्तमान से पहले था। कविता में, यह अक्सर बीते हुए पलों और उनसे जुड़ी भावनाओं की याद दिलाता है।

'क़ब्ल' का उपयोग कवि बीते समय की यादों को जगाने के लिए करते हैं। यह अतीत की लालसा या जो कभी था उस पर चिंतन को दर्शा सकता है।

अपने सार में, 'क़ब्ल' अतीत का एक पुल है, समय की निरंतरता की एक कोमल याद दिलाता है।