Meaning of

क़हक़हे

qahqahe • قہقہے

हँसी; उल्लास; आनंद

laughter; mirth; joy

ہنسی; خوشی; مسرت

Arabic

क़हक़हे ओढ के जा तो रहे हो दोस्त मगर
ये उदासी है छुपाए से नहीं छुपती है

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एक उस को ही पता थी मेरी आदत
वो नहीं हँसता था मेरे कहकहे पर

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सुनाए दिल कहानी और दिखे ख़ामोश
ये धड़कन और सारे क़हक़हे ख़ामोश

कभी जब ग़ौर से देखी कोई सूरत
'बशर' आँखें सवाली लब मिले ख़ामोश

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न वो क़हक़हे न वो महफ़िलें न वो मय-कदे की है रौनक़ें
हुआ क्या कि देखते-देखते ये निज़ाम सारा बदल गया

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सब सेे कठिन सवाल पूछता है
हम सेे हमारा हाल पूछता है

जवाब कहकहे से निकलते हैं
पूछने वाला बेमिसाल पूछता है

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क़ब्र में क़हक़हे हैं उसी की सनद
बोली थी "ख़ुश रहे तू जहाँ भी रहे"

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लबों को कुछ तो नए साल क़हक़हे देना
पुरानी आँखों को कुछ ख़्वाब अब नए देना

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दिया है हुक्म ग़मों ने तमाम उम्र शजर
तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-लब क़हक़हे नहीं करेंगे

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क़हक़हे ओढ के जा तो रहे हो दोस्त मगर
ये उदासी है छुपाए से नहीं छुपती है

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एक उस को ही पता थी मेरी आदत
वो नहीं हँसता था मेरे कहकहे पर

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क़हक़हे शब्द हँसी की ध्वनि और उपस्थिति को जागृत करता है, एक ऐसा उल्लास जो वातावरण को भर देता है। कविता में, यह केवल हँसी का कार्य नहीं है, बल्कि एक अनियंत्रित खुशी की अभिव्यक्ति है, एक क्षण जहाँ आत्मा उल्लास में मुक्ति पाती है।

कवि अक्सर 'क़हक़हे' का उपयोग मौन या दुःख के विपरीत करते हैं, अप्रत्याशित खुशी के क्षणों को उजागर करते हैं। यह उदासी से एक विराम या स्थिर दुनिया में जीवन के अचानक विस्फोट का प्रतीक हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'क़हक़हे' अस्तित्व की हल्केपन की याद दिलाता है, जीवन की क्षणिक खुशियों का उत्सव है।