Meaning of

क़रार

qaraar • قرار

शांति; विश्राम; सहमति

peace; rest; agreement

قرار; آرام; اتفاق

Arabic

ये दिन तो सर्फ़ आप के वादों में हो गए
अब दिन नया निकालिए इक़रार के लिए

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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

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झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं

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इक बे-क़रार दिल से मुलाक़ात कीजिए
जब मिल गए हैं आप तो कुछ बात कीजिए

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तेरे क़ौल-ओ-क़रार से पहले
अपने कुछ और भी सहारे थे

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रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले
क़रार दे के तिरे दर से बे-क़रार चले

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ये मज़ा था दिल-लगी का कि बराबर आग लगती
न तुझे क़रार होता न मुझे क़रार होता

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वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या'नी वा'दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

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छत पे सिगरेट ले के बैठा है
चाँद भी बे-क़रार है शायद

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ख़ुश भी हो लेते हैं तेरे बे-क़रार
ग़म ही ग़म हो इश्क़ में ऐसा नहीं

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ये दिन तो सर्फ़ आप के वादों में हो गए
अब दिन नया निकालिए इक़रार के लिए

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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

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क़रार शांति और समाधान की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर तूफान के बाद की शांति, स्वीकृति में पाई गई शांति या एक सुलझे हुए दिल की शांति का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि क़रार का उपयोग स्वीकृति की शांति और आंतरिक शांति की सुंदरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह उथल-पुथल और संघर्ष के विपरीत, विश्राम में आत्मा की शालीनता को उजागर करता है। यह शब्द सामंजस्य और संतोष का सार पकड़ता है।

क़रार दिल के शांत कोनों में शांति की कोमल फुसफुसाहट है।