Meaning of

क़यामत

qayamat • قیامت

प्रलय; क़यामत का दिन; अंतिम न्याय

doomsday; apocalypse; ultimate reckoning

قیامت; روزِ محشر; آخری حساب

Arabic

गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से
पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम

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यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे

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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे

यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे

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मेरे कमरे में उदासी है क़यामत की मगर
एक तस्वीर पुरानी सी हँसा करती है

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तुम ने उस रोज़ क़यामत ही उठा रक्खी थी
तुम ने उस रोज़ मुझे देखते देखा होता

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जो पर्दों में ख़ुद को छुपाए हुए हैं
क़यामत वही तो उठाए हुए हैं

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थक गए हम करते करते इंतिज़ार
इक क़यामत उन का आना हो गया

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ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया

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आप सब कुछ देख सकतें हैं अगर
फिर हमारी बेबसी भी देखिए

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आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम

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गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से
पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम

26

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यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का
वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे

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यह शब्द अंतिमता और न्याय का भाव उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर युग के अंत या गहन परिवर्तन का प्रतीक होता है, जिसमें अनिवार्यता और ब्रह्मांडीय पैमाना होता है।

कवि 'क़यामत' का उपयोग भावनात्मक उथल-पुथल की विशालता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत प्रलय या सामाजिक पतन का प्रतिनिधित्व कर सकता है। अक्सर आशा या नवीनीकरण के विपरीत, यह परिवर्तन की गंभीरता को रेखांकित करता है।

क़यामत अंत की गहरी गंभीरता को समेटे हुए है। इसकी छाया में, कवि निराशा और नई शुरुआत के बीज दोनों पाते हैं।