Meaning of

क़ीमा

qeema • قیمہ

कुटा हुआ मांस; पिसा हुआ मांस

minced meat; ground meat

قیمہ; پسا ہوا گوشت

Arabic

किसी ने मुफ़्त में पाया है उस को
जो हर क़ीमत पे मुझ को चाहिए था

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उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है

तेरे साथ नहीं हैं तो एहसास हुआ
इक तस्वीर की कितनी क़ीमत होती है

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ये जो दौलत कमानी पड़ रही है
बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ रही है

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वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

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दीवार उठाने की तिजारत नहीं आई
दिल्ली में रहे और सियासत नहीं आई

बिकने को तो दिल बिक गया बाज़ार में लेकिन
जो आप बताते थे वो क़ीमत नहीं आई

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आँसुओं से चुकायी है क़ीमत
ये हुनर बे-सबब नहीं आता

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यूँँ मेरे सामने बढ़-चढ़ के मत आ ऐ अमीर-ए-शहर
तेरे जैसे अमीरों से मेरी क़ीमत नहीं मिलती

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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

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मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं
मिरे शबाब की क़ीमत तिरा शबाब नहीं

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मेरी इस हालत पे हँसने वाले ऐ शख़्स
एक दिन दुनिया तुझे भी आज़माए

तुझ को भी मजबूर कर दे तेरे अपने
दिल दुखाने की तू भी क़ीमत चुकाए

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किसी ने मुफ़्त में पाया है उस को
जो हर क़ीमत पे मुझ को चाहिए था

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उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है
पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है

तेरे साथ नहीं हैं तो एहसास हुआ
इक तस्वीर की कितनी क़ीमत होती है

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मूल रूप से बारीक कटा हुआ या पिसा हुआ मांस, क़ीमा पाक परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि का एहसास कराता है। कविता में, यह जीवन की जटिलताओं का प्रतीक हो सकता है, जहाँ प्रत्येक टुकड़ा, भले ही छोटा हो, एक बड़े संपूर्ण में योगदान देता है।

कवि अक्सर क़ीमा का उपयोग विखंडन और एकता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह बाधाओं के टूटने या विविध तत्वों के एक सामंजस्यपूर्ण संपूर्ण में मिल जाने का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

क़ीमा, अपनी काव्यात्मक सार में, हमें एकता और विविधता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।