Meaning of

याद-ए-जानाँ

yaad-e-jaanaan • یاد جاناں

प्रिय की स्मृति; प्रियजन की याद

memory of the beloved; remembrance of the dear one

یاد جاناں; محبوب کی یاد

Persian

अगर आए हमारी याद तुम को
किसी की ख़ामियों में ढूँड लेना

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काँटे ही आते रहे इस ज़िंदगी की राह में
ज़ख़्म हम खाते रहे और याद तुम आते रहे

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तुम्हारे साथ यदि तुम ख़ुद खड़े हो
यक़ीं मानों कि तुम सब सेे बड़े हो

विजेता माने जाओगे सदा ही
अगर तुम आख़िरी दम तक लड़े हो

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क्या थे क्या हो गए हैं हम
याद-ए-जानाँ में खो गए हैं हम

पेड़ पर फल ज़रूर आएगा
प्यार के बीज बो गए हैं हम

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क्या थे क्या आज हो गए हैं हम
याद-ए-जानाँ में खो गए हैं हम

पेड़ पर फल ज़रूर आएगा
प्यार के बीज बो गए हैं हम

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बे-वफ़ा का बे कहा मैं ने फ़क़त
और सब को याद तुम आने लगी

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ज़ख़्म-ए-दिल भरने वाले थे मेरे शजर
याद तुम आए ये फिर हरे हो गए

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मेरी हालत मेरी सूरत से पहचानी नहीं जाती
किसी सूरत तेरी सूरत से हैरानी नहीं जाती

हुजूम-ए-याद-ए-जानाँ है मेरे पहलू-नशीं 'जस्सर',
मगर फिर भी मेरे इस दिल से वीरानी नहीं जाती |

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याद तुम को भी बहुत आएँगे हम
बे-सबब जिस रोज़ मर जाएँगे हम

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अगर आए हमारी याद तुम को
किसी की ख़ामियों में ढूँड लेना

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काँटे ही आते रहे इस ज़िंदगी की राह में
ज़ख़्म हम खाते रहे और याद तुम आते रहे

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यह वाक्यांश किसी के विचारों में प्रियतम की कोमल और स्थायी उपस्थिति को दर्शाता है। कविता में, यह स्मृतियों की मधुर और कड़वी प्रकृति को व्यक्त करता है जो बनी रहती है।

कवि अक्सर इसका उपयोग लालसा और स्मृति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह उन छंदों में प्रकट होता है जो अतीत और प्रेम के स्थायी प्रभाव पर विचार करते हैं।

कविता में, प्रिय की स्मृति एक कोमल प्रतिध्वनि है, जो समय के गलियारों में गूंजती है।