Meaning of

याद-ए-रफ़्ता

yaad-e-rafta • یاد رفتہ

बीते समय की यादें; गुज़रे हुए लम्हों की स्मृतियाँ

memories of the past; bygone recollections

گزشتہ یادیں; بیتے ہوئے لمحات کی یادیں

Persian

संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने
फिर उस सेे मिला हाथों को चूम दिया मैं ने

जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी
इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने

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हर मकतब के दरवाज़े पर जा-जाकर सज्दा करता अब
मक़्सद मेरा मत पूछो बस याद-ए-रफ़्ता ले जाए जब

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मैं याद-ए-रफ़्तगाँ की याद में बहुत रोया
तभी तो वक़्त-ए-मुलाक़ात में बहुत रोया

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संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने
फिर उस सेे मिला हाथों को चूम दिया मैं ने

जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी
इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने

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हर मकतब के दरवाज़े पर जा-जाकर सज्दा करता अब
मक़्सद मेरा मत पूछो बस याद-ए-रफ़्ता ले जाए जब

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यह वाक्यांश एक प्रकार की पुरानी यादों और लालसा की भावना को जगाता है, उन क्षणों के सार को पकड़ता है जो समय की तहों में खो गए हैं। कविता में, यह अक्सर यादों की खट्टी-मीठी प्रकृति का प्रतीक होता है, जहाँ खुशी और दुःख आपस में मिलते हैं।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग पुरानी यादों को जगाने के लिए करते हैं। यह खोए हुए प्यार, बचपन, या अब दूर हो चुके खुशी के क्षणों पर चिंतन कर सकता है। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करते हुए आशा या भविष्य के शब्दों के विपरीत होता है।

स्मृति के शांत कोनों में, याद-ए-रफ़्ता उन कहानियों को फुसफुसाती है जो कभी थीं।