Meaning of

यासियत

yaasiyat • بنت

उदासी; विषाद

melancholy; sadness

اداسی; غم

Arabic

ख़ुद को शीशा कर लिया है यार मैं ने
अब तो तेरा देखना बनता है मुझ को

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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे

तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे

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मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

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ज़िक्र तुम्हारा बहुत ज़रूरी इन ग़ज़लों में जानेमन
चाय बिना अदरक को डाले अच्छी थोड़ी बनती है

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पहली ग़लती पर मत छोड़ो मुझ को तुम
पहली रोटी गोल नहीं बनती जानाँ

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बनता था दिन तुम्हारा कभी देख कर मुझे
तुम वक़्त दे रहे हो घड़ी देख कर मुझे

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

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उस की तस्वीर बंद आँखों से
पहले बनती थी अब नहीं बनती

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ये बनता सेतु कैसे तेरे उस दिल तक मुक़द्दर में
कि पत्थर तैरता मेरा नहीं तेरे समुंदर में

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ख़ुद को शीशा कर लिया है यार मैं ने
अब तो तेरा देखना बनता है मुझ को

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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे

तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे

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'यासियत' शब्द एक गहरी उदासी का भाव उत्पन्न करता है, एक शांत विषाद जो आत्मा में समा जाता है। कविता में, यह अक्सर लालसा और दिल के मौन आँसुओं का सार पकड़ता है।

'यासियत' का उपयोग कवि अधूरी इच्छाओं के दुःख को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम, समय के बीतने और परिवर्तन की अनिवार्यता पर आधारित कविताओं में दिखाई देता है।

कविता की दुनिया में, 'यासियत' आत्मा के गहरे दुःखों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।