Meaning of

यतीम-ओ-ग़रीब

yateem-o-gareeb • یتیم و غریب

अनाथ और गरीब; निर्धन

orphan and poor; destitute

یتیم و غریب; نادار

Arabic

यह वाक्यांश असुरक्षा और कठिनाई की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर उन लोगों के संघर्षों का प्रतीक होता है जो समाज द्वारा हाशिए पर और भुला दिए जाते हैं।

कवि इसका उपयोग सामाजिक अन्याय को उजागर करने और सहानुभूति जगाने के लिए करते हैं। यह मानव स्थिति और करुणा की आवश्यकता की याद दिलाता है।

यतीम-ओ-ग़रीब दिल की सहानुभूति की क्षमता और इसे जागृत करने में कवि की भूमिका की बात करता है।