Meaning of

ज़ार-ज़ार

zaar-zaar • زار زار

रोना; विलाप करना; अत्यधिक रोना

weeping; lamenting; crying profusely

رونا; ماتم کرنا; زار زار رونا

Persian

गर्मी की सुब्ह-सुब्ह की ठंडी हवा हो तुम
इस लू लगे मरीज़ की जाना शिफ़ा हो तुम

जिस को में हँसते-हँसते करूँँ शौक़ से क़ुबूल
ऐसे ही एक जुर्म की प्यारी सज़ा हो तुम

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पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या

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पहले हँसते-हँसते बातें करते थे
अब जो बातें करते-करते रोते हैं

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क्या हो गया है दिल को जो यूँँ चीख़ता है ये
आवाज़ रोज़ रोज़ किसे दे रहा है ये

दुनिया शराब ज़हर इसे नाम कुछ भी दे
पर हम तो जानते हैं ग़मों की दवा है ये

जाँ को मेरी क़रार भी जुज़ रंज-ओ-ग़म कहाँ
अब कोई मसअला न रहा मसअला है ये

हम से निगाह फेर के जाना हुज़ूर का
फिर शर्तिया नया कोई तर्ज़-ए-जफ़ा है ये

भागा करे उधर कि जिधर रास्ता नहीं
दिल को कहें भी क्या कि कहाँ मानता है ये

अब और छेड़िए न मेरे दिल को देखिए
पहले ही ज़ार ज़ार लहू रो चुका है ये

इक बार 'मुन्तज़िर' जो लगाया ज़बान से
फिर उम्र भर न जाएगा कैसा नशा है ये

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पहले सानी मिसरा लिख्खो फिर ऊला बाँधा जाएगा
ग़म हँसते-हँसते सहलो तो ग़म रोता-रोता जाएगा

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ज़िंदगी फ़क़त हँसते-हँसते तो नहीं कटती
कितना भी छुपाओ तुम अश्क आ ही जाते हैं

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माथे पर न शिकन दिख जाए, होंठों को सी जाते हैं
हम हँसते-हँसते ही सारे रंज-ओ-ग़म पी जाते हैं

कुछ कुछ पानी के क़तरे सी फ़ितरत पाली है हम ने
गर हाथों से फिसले तो फिर यार फिसल ही जाते हैं

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ऐ जाने वाले ख़्वाब में आओ न बार-बार
तुम को जो देखता हूँ मैं रोता हूँ ज़ार-ज़ार

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कैसे कह दूँ सब को उस पल कुछ नइँ हुआ मुझे
जिस पल हँसते-हँसते उस ने भाई कहा मुझे

बात हँसी की है लेकिन मेरा सच तो ये है
हुआ नहीं कुछ लेकिन कुछ भी हो सकता था मुझे

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जब याद आते संग बिताए वो लम्हें सो
तब ज़ार-ज़ार अश्कों की बरसात होती है

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गर्मी की सुब्ह-सुब्ह की ठंडी हवा हो तुम
इस लू लगे मरीज़ की जाना शिफ़ा हो तुम

जिस को में हँसते-हँसते करूँँ शौक़ से क़ुबूल
ऐसे ही एक जुर्म की प्यारी सज़ा हो तुम

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पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या

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'ज़ार-ज़ार' शब्द गहरे दुःख और अनियंत्रित आँसुओं की छवि प्रस्तुत करता है। यह एक ऐसे दिल की कच्ची भावना को पकड़ता है जो शोक से अभिभूत है। कविता में, यह अक्सर उस गहन उदासी का प्रतीक होता है जिसे केवल शब्द व्यक्त नहीं कर सकते।

कवि 'ज़ार-ज़ार' का उपयोग दिल टूटने की तीव्रता या व्यक्तिगत हानि की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मानव पीड़ा के सार्वभौमिक अनुभव को भी चित्रित कर सकता है, पाठकों के साथ भावनात्मक स्तर पर गूंजता हुआ।

कविता में, 'ज़ार-ज़ार' आत्मा को शुद्ध करने के लिए आँसुओं की शक्ति का प्रमाण है।