Meaning of

ज़ख़्मी

zakhami • زخمی

घायल; चोटिल

wounded; injured

زخمی; مجروح

Arabic

तू मिरे हँसते हुए चेहरे पे मत जा
एक ज़ख़्मी आदमी है मेरे अंदर

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रा'नाइयाँ समेट के सारे जहान की
जब कुछ न बन सका तेरी आँखें बनाईं तब

मैं इश्क़ हूँ रुका न किसी भी क़फ़स में तो
मज़बूतियों भरी ये सलाख़ें बनाईं तब

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किसी इक बे-वफ़ा पे दिल जो हारा था
वही हाँ मर गया जो ग़म का मारा था

हमारा जिस्म ज़ख़्मी होना लाज़िम था
ज़मीं से आसमाँ को ढेला मारा था

किसी गड्ढे में लाज़िम था मेरा गिरना
ज़मीं से चाँद जो मैं ने निहारा था

बहुत ही देर कर दी लौटने में यार
ख़ुदा का हो गया वो जो तुम्हारा था

ख़ुदा को प्यारा होगा किस को था मालूम
जो तुम को हम को उस को सब को प्यारा था

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तेरी नज़र से कोई रोज़ जख्मी होता है
ख़याल रखना किसी दिन वो मारा न जाएँ

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ज़ेहन ज़ख़्मी है बद-ख़यालों से
बात गर नफ़सियाती की जाती

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ये सोच मत जो जिस्म बिन कपड़ा दिखूँ मैं घूमता
ज़ख़्मी फिरूँ हर सू मगर मुझ पर दु'आओं का करम

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तुझ को भुला के देखूँ या बस तुझ को सोचूँ
दोनों शकलों में मेरा दिल ज़ख़्मी होगा

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हम को उम्र से ख़तरा ही ख़तरा है
सिर से पैरों तक ज़ख़्मी कर देगी

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तू मिरे हँसते हुए चेहरे पे मत जा
एक ज़ख़्मी आदमी है मेरे अंदर

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रा'नाइयाँ समेट के सारे जहान की
जब कुछ न बन सका तेरी आँखें बनाईं तब

मैं इश्क़ हूँ रुका न किसी भी क़फ़स में तो
मज़बूतियों भरी ये सलाख़ें बनाईं तब

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‘ज़ख़्मी’ शब्द शारीरिक और भावनात्मक घावों का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर दिल के गहरे घावों का प्रतीक होता है, वे अदृश्य चोटें जो हमारे आंतरिक संसार को आकार देती हैं।

कवि 'ज़ख़्मी' का उपयोग प्रेम और हानि के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एकतरफा प्रेम से बिखरे दिल या अतीत की चोट के लंबे समय तक रहने वाले दर्द का वर्णन कर सकता है। यह शब्द अक्सर उपचार के विपरीत होता है, स्मृति की स्थायित्व को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ख़्मी' हमारे गहरे घावों की स्थायी प्रकृति को व्यक्त करता है।