
किसी इक बे-वफ़ा पे दिल जो हारा था
वही हाँ मर गया जो ग़म का मारा था
हमारा जिस्म ज़ख़्मी होना लाज़िम था
ज़मीं से आसमाँ को ढेला मारा था
किसी गड्ढे में लाज़िम था मेरा गिरना
ज़मीं से चाँद जो मैं ने निहारा था
बहुत ही देर कर दी लौटने में यार
ख़ुदा का हो गया वो जो तुम्हारा था
ख़ुदा को प्यारा होगा किस को था मालूम
जो तुम को हम को उस को सब को प्यारा था
— Irshad Siddique "Shibu"















