Meaning of

जख़्माँ

zakhmaan • زخموں

घाव; चोटें; निशान

wounds; injuries; scars

زخم; چوٹیں; نشان

Arabic

मैं ने देखा छोटे मोटे ज़ख़्मों को भी
बारिश पाकर हरे भरे हो ही जाते हैं

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चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उस के घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता

42

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ज़िन्दगी, यूँँ भी गुज़ारी जा रही है
जैसे, कोई जंग हारी जा रही है

जिस जगह पहले से ज़ख़्मों के निशां थे
फिर वहीं पे चोट मारी जा रही है

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और क्या इस से ज़ियादा कोई नर्मी बरतूँ
दिल के ज़ख़्मों को छुआ है तिरे गालों की तरह

31

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दिल के ज़ख़्मों का कुछ क्या न करो
चाक हो जाए तो सिया न करो

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जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है
ज़ख़्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है

उस के घर से दूर नहीं है मेरा घर
रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है

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भरा है मेरे दिल को ज़ख़्मों से उस ने
वो जिस की मुझे माँग भरनी थी यारों

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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किसी की याद आती है किसी को याद करता हूँ
मैं ये सब काम ज़ख़्मों की इबादत बा'द करता हूँ

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मैं ने देखा छोटे मोटे ज़ख़्मों को भी
बारिश पाकर हरे भरे हो ही जाते हैं

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चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उस के घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

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यह शब्द घावों के शारीरिक और भावनात्मक दर्द को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर दिल और आत्मा के गहरे निशानों का प्रतीक होता है, जो जीवन के संघर्षों और दुखों को दर्शाता है।

कवि इसका उपयोग अव्यक्त भावनात्मक घावों के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उपचार और शांति के शब्दों के विपरीत होता है, जो पीड़ा की निरंतरता को दर्शाता है।

जख़्माँ दर्द की स्थायी प्रकृति को दर्शाता है, दिल की सहनशीलता की याद दिलाता है।