Meaning of

ज़ौक़-ए-तजल्ली

zauq-e-tajalli • نرا

दैवीय प्रकाश के प्रति रुचि; आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि

taste for divine illumination; spiritual insight

الہی روشنی کا ذوق; روحانی بصیرت

Arabic

मोहब्बत गर नहीं होती तो भौंरा क्या किया करता
न कोई आश्ना होता न कोई गुल खिला करता

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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं

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अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं

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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत
दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले

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दिन भर भूखा रह कर ही तुम जानोगे
रोटी का भी स्वाद निराला होता है

जिन का साथ नहीं देती दुनिया सारी
उन का ही बस ऊपर वाला होता है

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जो ख़ुद को रब समझते थे उन्हें भी मौत आई थी
ख़ुदा बस एक है जिस की निराली शान होती है

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मुझे कोई भी काँटा जब दिखे नहीं मेरे लिए
निराश होता हूँ वो खो गए कहीं मेरे लिए

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मिरे अंदाज़ ज़माने से निराले होंगे
आज अँधेरे हैं तो क्या कल को उजाले होंगे

एक रोटी में सुनाते हैं तुझे कितना कुछ
कल से होंटों पे तिरे मेरे निवाले होंगे

कम से कम सैकड़ों को भूख ने मारा होगा
बच गए जितने सभी दर्द ने पाले होंगे

अब हमें मौत भी मक़बूल नहीं करती है
ज़िंदगी तू ही बता किस के हवाले होंगे

हर दफ़ा छीन लिया मेरा निवाला सबने
फिर तो बच्चे भी तिरे भूख ने पाले होंगे

अरे कमरे में मिरे कुछ भी नहीं है सच्ची
चार दीवार मिलेंगी बचे जाले होंगे

शहर-ए-दिल में सुनो तो कोई नहीं रहता है
तुम कहाँ जा रहे हो सब में ही ताले होंगे

छोड़ के ख़ुद को ज़माने को दिया है मरहम
फिर तो बेशक ही तिरे पाँव में छाले होंगे

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हर ओर बहा ख़ून कहीं लाश बिछी है
इंसान निराशा में नहीं आस बची है

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सितम को कर दिया रुस्वा तबस्सुम-ए-लब से
अली के शे'र तेरा फन बड़ा निराला है

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मोहब्बत गर नहीं होती तो भौंरा क्या किया करता
न कोई आश्ना होता न कोई गुल खिला करता

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इस शहर में जीने के अंदाज़ निराले हैं
होंटों पे लतीफ़े हैं आवाज़ में छाले हैं

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ज़ौक़-ए-तजल्ली दैवीय प्रकाश और समझ के लिए लालसा को पकड़ता है। यह एक गहरी आध्यात्मिक प्यास को दर्शाता है, एक उच्च शक्ति द्वारा प्रकाशित होने की इच्छा, जो साधारण क्षेत्र से परे है।

कवि अक्सर ज़ौक़-ए-तजल्ली का उपयोग आत्मा की प्रबोधन और दैवीय संबंध की लालसा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आध्यात्मिक यात्रा के लिए एक रूपक है, एक उत्कृष्टता की खोज।

ज़ौक़-ए-तजल्ली हृदय की प्रकाश के लिए अनंत खोज को संबोधित करता है। यह दैवीय की खोज में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।