मुसलसल उस की सूरत देखनी है
हमें आँखों की हिम्मत देखनी है
तुम्हें मतलब ही क्या दिल से हमारे
तुम्हें तो सिर्फ़ दौलत देखनी है
बदन भी साथ ले कर आइएगा
अगर मेरी शराफ़त देखनी है
वो जो क़िस्मत हमारी लिख रहा है
उसे भी पहले मेहनत देखनी है
हथेली पर तू मेरा नाम लिख ले
मुझे मेहंदी की रंगत देखनी है
मुझे ख़ुद से घटाकर देख लेना
तुझे गर अपनी क़ीमत देखनी है
— Harsh saxena















