dil men jo mohabbat kii raushni nahin hoti | दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती

  - Hastimal Hasti

दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती
इतनी ख़ूबसूरत ये ज़िंदगी नहीं होती

दोस्त पे करम करना और हिसाब भी रखना
कारोबार होता है दोस्ती नहीं होती

ख़ुद चराग़ बन के जल वक़्त के अँधेरे में
भीक के उजालों से रौशनी नहीं होती

शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का
बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती

खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती

  - Hastimal Hasti

More by Hastimal Hasti

As you were reading Shayari by Hastimal Hasti

Similar Writers

our suggestion based on Hastimal Hasti

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari