चलो देखें कि क़ुर्बत कौन देता है
अब इस दीवार को छत कौन देता है
खुलेगा राज़ अब ये तेरी ज़ुल्फ़ों से
हवा को इतनी हिम्मत कौन देता है
नई बस्ती बसाने वाले क्या जाने
पुराने घर को ज़ीनत कौन देता है
ये तो हम हैं जो तुमको साथ रखते हैं
वगरना तुमको इज़्ज़त कौन देता है
हमारे गाँव के लड़के बताएँगे
बड़े शहरों में ज़िल्लत कौन देता है
किसी दिन पूछना तुम अपनी आँखों से
मेरे होंठों को रिश्वत कौन देता है
यूँँ ही बोला नज़ूमी हाथ पढ़कर कल
बताओ ऐसी क़िस्मत कौन देता है
ये कोई पूछने की बात है पागल
ग़रीबों को मुसीबत कौन देता है
तरस खाओ कुछ अपने हाल पर 'धीरेन्द्र'
ग़मों को इतनी क़ुर्बत कौन देता है
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