ज़रा भी दिल में नहीं है चुभन बिछड़ने की
वगरना माथे पे होती शिकन बिछड़ने की
अधर भी उस परी के आज तक नहीं चू
में
बता रही है जो कारण बदन बिछड़ने की
अभी तो मिलने भी वो माह-रू नहीं आई
अभी से हो रही तुमको घुटन बिछड़ने की
वो लौट आएगा उसकी नज़र बता रही है
पसंद आया है उसको छुअन बिछड़ने की
जब ईद आती है परदेश में तो मिल के गले
मनाते है सभी मातम वतन बिछड़ने की
हमारे पाँव के छालों से गर न जान सको
तो झुर्रियाँ बता देंगी थकन बिछड़ने की
विरह की आग में धीरेन्द्र क्यूँ झुलस रहे हो
लगी थी तुमको ही पहले अगन बिछड़ने की
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