हो गया मैं पूरा ही बर्बाद लोगों
तुम से थी भी इक यही फ़रियाद लोगों
एक दिन ख़ल्वत से मैं ने यारी कर ली
कब तलक रहता यूँॅं ही नाशाद लोगों
अब तो मुझ को छोड़ दो हालत पे मेरी
अब तो पल पल मत करो तुम याद लोगों
ये क़फ़स अब जानलेवा हो गया है
मुझ परिंदे को करो आज़ाद लोगों
मौत ने बख़्शे हैं कुछ दिन यूँॅं न सोचो
ज़िन्दगी तुम ने ही की ईज़ाद लोगों
— Dhirendra Pratap Singh















