waqt ik pal men yuñ dushwaar nikal jaata hai | वक़्त इक पल में यूँँ दुश्वार निकल जाता है

  - Aditya Tiwari

वक़्त इक पल में यूँँ दुश्वार निकल जाता है
ख़ून के रब्त से भी प्यार निकल जाता है

और क्या घाव अता होंगे मेरे पाँव को अब
कोई भी ख़ार हो हर बार निकल जाता है

जब मदद हाथ बढ़ाए तो लबों से पहले
मेरी ख़ुद्दारी से इंकार निकल जाता है

हर वो दिलदार जिसे चाहने लगता हूँ मैं
ऐन मौक़े पे समझदार निकल जाता है

उतनी रफ़्तार से दिन और निकल जाते काश
जितनी रफ़्तार से इतवार निकल जाता है

  - Aditya Tiwari

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