main bhi aage badhoon aur bheed ka hissa ho jaaun | मैं भी आगे बढ़ूँ और भीड़ का हिस्सा हो जाऊँ

  - Javed Naseemi

मैं भी आगे बढ़ूँ और भीड़ का हिस्सा हो जाऊँ
इस से अच्छा तो यही है कि मैं तन्हा हो जाऊँ

प्यास को मेरी जो इक जाम न दे पाया कभी
तिश्नगी उस की ये कहती है मैं दरिया हो जाऊँ

मुझ को जकड़े हुए रिश्तों की हक़ीक़त मत पूछ
बस चले मेरा अगर तो मैं अकेला हो जाऊँ

ले के जाऊँ कहाँ एहसास-ए-वफ़ादारी को
दिल तो कहता है कि मैं भी तेरे जैसा हो जाऊँ

हो किसी तौर तो दुनिया की तवज्जोह मुझ पर
एक दो पल के लिए मैं भी तमाशा हो जाऊँ

दिल की मजबूरी 'अजब चीज़ है वर्ना 'जावेद'
कौन चाहेगा भला ख़ुद कि मैं रुस्वा हो जाऊँ

  - Javed Naseemi

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