बुराई का ज़माना वो बुराई करके मानेगा
मेरा दिल भी तो पागल है ख़ुदाई करके मानेगा
उसे मंज़िल न भाएगी जुदाई करके मानेगा
वो मानेगा नहीं सीधा लड़ाई करके मानेगा
उजालों से कहो थोड़ी ठहर जाऍं पनाहों में
अंधेरा ताज पहनाए रिहाई करके मानेगा
वफ़ा को वो समझता है सज़ा की इक निशानी सी
मगर इक दिन मोहब्बत की दुहाई करके मानेगा
वो सच के साथ रह पाए ये मुमकिन ही नहीं लगता
हक़ीक़त को भी झूठी वो गवाही करके मानेगा
परिंदा कह रहा है अब दुआओं की ज़बाँ में सब
ये दिल सब कुछ उसी की रस्म-दाई करके मानेगा
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