कहीं पर दूर दरिया के किनारों पर खड़े हैं हम
तेरे दिल से निकाले दर-बदर होकर खड़े हैं हम
मुझे तुम से मोहब्बत है इधर देखो ना तुम जाना
तुझे पाने की ख़ातिर हर जगह मिटकर खड़े हैं हम
बड़े-बूढ़ों ने जब पूछा नगर कैसे जवाँ है ये
कहा हम ने लुटाकर गाँव जो डटकर खड़े हैं हम
— Kushal "PARINDA"















