हसीं वादियों की सहर है
चलो धूप भी मुख़्तसर है
चला तीर तरकश से वर्ना
निशाने पे बस तेरा सर है
जियो ज़िंदगी मुस्कुराके
यहाँ बे-रुख़ी का असर है
परखते परखते परखते
परखना लगे इक हुनर है
नज़र बाज़ हूँ इसलिए ही
मेरी आँख परवाज़ पर है
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