toot jaa.e yaqeen jab koii | टूट जाए यक़ीन जब कोई

  - Manohar Shimpi

टूट जाए यक़ीन जब कोई
क्यूँ करे इंतिजार तब कोई

देखने से लगा वो अपना ही
जान ले तू हसब-नसब कोई

दौड़ता जब दिमाग़ ही सब का
सीखता तब नया लक़ब कोई

तोड़ती दम अगर सियासत ही
डोर था
में तभी 'अजब कोई

आदमी होशियार वह लगता
सीख फिर जीने के सबब कोई

जब बयाँ हिज्र हो सितारों से
झिलमिलाते कटे न शब कोई

रूठ के ही गया 'मनोहर' वो
छोड़ जाए न दोस्त कब कोई

  - Manohar Shimpi

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